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श्रीमद्देवी भागवत महापुराण! मणिद्वीप वासिनी है आदि शक्ति: आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं. देखें


मनोज नौडियाल

देहरादून..... मूल प्रकृति भगवती का विशाल मंदिर वही है जिस मंदिर के चारो ओर सुंदर मणी रचित स्तम्भ है सृंगार मंडप मुक्ति मंडप एकांत मंडप करोडों सूर्य के समान चारो ओर वाटिकाओं से सुशोभित मणिद्वीप में सर्वप्रथम श्रृंगार मंडप है व उसके बीच दिब्य सिहाशन पर देवी विराजती है उक्त विचार ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने नव विहार कलोनी चुखुवाला में चल रही श्रीमद्देवी भागवत महापुराण में व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे शरीर का मणिपूरक चक्र है जिस पर ध्यान केंद्रित करने से चारों ओर अच्छाईयों की सुगंध दृष्टि गत होने वाले लोगों की अच्छाई रूपी चमक यहाँ ध्यान केंद्रित करने पर होता है। 

मूल प्रकृति भगवती देवी सुंदर सोपान भुवनेश्वरी के रूप में विभक्त होकर अपनी अहेतु की लीला करती है जो कि सृष्टि के प्रारम्भ में अर्धनारीश्वर कामदेव के दर्प को चूर करने के लिए मनोहर रूप में बनते हैं। उस समय उनके पांच नेत्र मणि युक्त भूषण में रहते हैं ऐसे देव के बाम भाग में भगवती भुवनेश्वरी बिराजति हैं जिनकी कृपा व साथ से भगवान सृजन पालन संहारक रूप में ब्रह्मा विष्णु महेश देवी देवताओं को चारों ओर घेरती बैठी है। वह शक्ति इच्छा शक्ति ज्ञान शक्ति क्रिया शक्ति युक्त रहती है जिनके नवरत्न बह कांचन उनके सम्पर्क से माहेश्वर को सर्वे स्वरात्मक सर्वे स्वरत्व प्राप्त हुआ है।

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वह देवी भारतवर्ष में जितने देवी उपासक है उन्ही के भाव अनुसार स्वरूप बनाती है राज उपद्रव देवो उपद्रव रुष्ठ व तुष्ठ होने पर करती है रुष्ठ होने पर अनेक देवी आपदाओं व संतुष्ट होने पर उन आपदाओं से बचाती है। 


हमारे भारत मे भक्ति मुक्ति रूपा माताओ का मातृत्व अक्षुण सनातन देवताओं को जुकने को मजबूर करती है। जैसे च्यवन ऋषि का अंधापन उनकी पत्नी सुकन्या के द्वारा दूर होना यौवन अवस्था मे पति को परिवर्तित करना परीक्षा में अस्विनि कुमारो के सामने तीन एक रूप में आंखे बंद कर अपने पति को अपनी ओर खीचना इस पर अस्विनी कुमार शरणागत हुए वहीं सुकन्या अपने पति को युवान व सौभाग्य बढ़ाती हुई पिता से यज्ञ करने पर अस्विनि कुमारों को यज्ञ भाग दिया तुलसी के जैसा सत्कर्म अपने पति शंख चूड़ को दानवी योनि होते हुए सुरक्षित रखते हुए व भगवान विष्णु को श्राप देते हुए लोक पूज्य बनाया शंख चूड़ की हड्डी से शंख विष्णु जी को शालिग्राम के रूप में पूजे जाते हैं आदि जीवन में घटने वाले प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए भाव विभोर होते हुए दूर दराज से आये लोग उपस्थित थे। 


वहीं कथा के यजमान कमलानंद भट्ट द्वारा बताया गया कि कल 9 तारीख को कथा का विश्राम व 1 बजे भंडारा होगा। इस अवसर पर मुख्य रूप से कमलानंद भट्ट, जानकी भट्ट, राजीवनारायन भट्ट, गीता भट्ट, संजय भट्ट, देव आनद चमोली, मित्रानंद भट्ट, सोनी देवी, विमला देवी, हर्षमनी चमोली, कृष्णा कोठीयाल, जगतम्बा चमोली, कमला प्रसाद भट्ट, अनिता साफल्य, अमित स्त्रोत्र, लक्ष्मी बहुगुणा,चंद्रबल्लभ बछेती, नंदा तिवारी, महावीर प्रसाद, रेखा उनियाल, जगदीश रानाकोटी, सुशीला पुंडीर, कमला चमोली, सुरेंद्र नौटियाल आदि भक्त गण उपस्थित थे !!!

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