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सुख दुख का कारण ही मानव का कर्म है: आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं. देखें


मनोज नौडियाल

देहरादून....... आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं बताते हैं कि पूर्व जन्म के अनुसार सुख-दुख हमारे जीवन मे आते हैं कर्म के निषेध होने पर हमारे जीवन में दो प्रकार की भक्ति आती है निर्गुण और सगुण। पूर्व जन्म के असत कर्म के कारण प्राणी रोगी अव्यव्स्थित जीवन के साथ धनाभाव में दुखी व सुकर्म के कारण स्वस्थ तन व धन की प्राप्ति होती है। निष्काम कर्म करने वाले बन्धन मुक्त हो जाते हैं उनकी भावी पीढियां सुख व आवागमन के चक्कर मे पड़ जाते हैं सकाम कर्म करने वाले पूण्य क्षीण होने पर धरा पर जन्म लेके सुख आनंद की प्राप्ति करके दुसरो को लाभ देते हैं व सुखी जीवन को प्राप्त करता है दान में अन्न दान श्रेष्ट है लेकिन दूसरे को मान देना भी एक दान के समान है जो पराम्बा के उपासक होते हैं। जन्म मृत्यु जरा व्याधि उनके निकट नही आ सकती जो शैव वैष्णव गाणपत्य इनमें से किसी भी देव का मंत्र ग्रहण करना अपने को जन्म मरण के चक्कर से छुड़ाना मनुष्य योनि एक ऐसी योनि है जो दुर्लभ अप्राप्य है व चेतना से भरपूर है ऐसी चेतना युक्त योनि को पाकर अपने जन्म मरण जरा दुख ब्याधियो से अपने को छुड़ा सकते हैं वो परा शक्ति जो वैखरी वाणी के रूप में विराजती है ह्रिदयस्थ भाव मे वाणी व अछि सोच के रूप में मनुष्य के गुण रूप में आती है।

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दान की महत्ता पर कहते हुए आचार्य शिव प्रसाद ममगांई ने कहा यह भारत का संस्कार रहा सच्चाई के मार्ग से न डिग कर पत्नी पुत्र को बेचने के बाद स्वय को चांडाल के हाथ बेच दिया। हरिश्चंद्र जैसे राजसुय यज्ञ करने वाले महादानी भारत मे ही हुए हैं। तभी धर्म और धर्म मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति परेशान होते हैं किंतु असफल नहीं होते। हरिश्चंद्र राजा धर्म के द्वारा परीक्षा लिए जाने पर भी अपने पुत्र पत्नी राज को प्राप्त कर गए और ये सब माया का ही खेल है जिसको हम आदिशक्ति भुवनेश्वरी सृजन पालन संहारक शक्ति के रूप में कहते हैं। 


राजा हरिश्चन्द्र की ईस्ट देवी सताक्षी देवी पूजा करने पर ऐश्वर्य युक्त राज इह लोक सुख की प्राप्ति हरिश्चंद्र को हुई ईस्ट की कृपा के बगैर सफलता को प्राप्त करना मुश्किल है आदि प्रसंगों पर हरिश्चंद्र प्रसंग पर लोग भावुक हो उठे।


इस अवसर पर मुख्य कमलानंद भट्ट, जानकी भट्ट, कमला प्रसाद भट्ट, सुरेंद्र नौटियाल, राजीवनारायन भट्ट, संजय भट्ट गीता भट्ट, साफल्य, सर्विल, अक्षित, जगदीश रानकोटी, विमला, हेमंती भट्ट, रेखा भट्ट आदि भक्त गण उपस्थित थे!!

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