विशेष: मातृ दिवस (मदर्स डे)
यह तो हम सभी लोग भली-भांति जानते ही हैं कि माँ, माताजी जैसे शब्दों में ममता का सार छुपा हुआ है। माँ और अम्मा जैसें शब्द भी एक बच्चे के जीवन को नई दिशा देते हैं और निस्वार्थ प्रेम की परिभाषा पूरी दुनिया को बताते हैं।
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आइए इसके पीछे का इतिहास जानने का प्रयास करते हैं।...... हर साल मई महीने में मदर्स डे मनाया जाता है और इस वर्ष 8 मई 2022 को यह खास दिवस मनाया जाएगा। यह सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में उतने ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, जितना कि भारतवर्ष में। मदर्स डे को मनाने के पीछे हमारे जीवन में माँ की महत्ता को दर्शाना है। अगर इसके इतिहास के विषय में बात की जाए तो पहला मदर्स डे 1908 में फिलाडेल्फिया के एना जार्विस द्वारा मनाया गया था। 12 मई 1998 को उन्होंने वेस्ट वर्जीनिया के ग्राफ्टन चर्च में अपनी स्वर्गवासी माँ के लिए एक मेमोरियल रखा था। एना जार्विस ने सफेद कार्नेशन पहने थे। लेकिन जैसे-जैसे रीति-रिवाज विकसित हुए वैसे-वैसे लोगों ने अपनी माँ के लिए लाल या गुलाबी रंग के कार्नेशन पहनना शुरू कर दिया और एक स्वर्गवासी माँ के लिए सफेद कार्नेशन पहनना शुरू कर दिया। वर्ष 1914 में यूएस प्रेसिडेंट वुडरो विल्सन ने मदर्स डे (Mother's Day 2022) को नेशनल हॉलि डे घोषित कर दिया। यह कई वर्षों तक चला और कुछ समय बाद लोगों ने दादी और चाची जैसे अन्य लोगों को भी मदर्स डे के सेलिब्रेशन में शामिल करना शुरू कर दिया। लोगों ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन महिलाओं ने भी एक माँ की भूमिका निभाई है। एना जार्विस ने उस नेशनल हॉलिडे को खत्म करने की कोशिश की जो उसके कारण शुरू हुई थी, क्योंकि वह चाहती थी कि मदर्स डे केवल एक दिन हो।
मदर्स डे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सभी माताओं के प्रति सम्मान, केयर और प्यार व्यक्त करने के लिए मनाया जाने वाला एक अवसर है। इस दिन को हम सभी लोग हमारी जिंदगी में एक माँ की भूमिका को सेलिब्रेट करने के लिए मनाते हैं। यह अवसर सभी को अपनी माँ और अपने आसपास की माताओं के लिए कुछ खास एवं यादगार पहल करने का मौका देता है। इस मौके पर इस बात का बेहद ध्यान रखना जरूरी है कि अपनी माँ का शुक्रिया अदा करने के लिए केवल एक दिन काफी नहीं हो सकता। अपनी माँ के लिए हर दिन खास बनाने की कोशिश करें, उनकी आँखों में कभी भी आँसू न आने दें। और उन्हें हर सम्भव खास होने का एहसास दिलाते रहें।।
संग्रह एवं प्रस्तुति:
राजीव थपलियाल (प्रधानाध्यापक), राजकीय प्राथमिक विद्यालय मेरुड़ा, विकासखंड- जयहरीखाल, जनपद- पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड।
(नोट: प्रस्तुत लेख में किसी भी तरह की छेड़-छाड़ या बदलाव नहीं किया गया है)
रिपोर्ट - मनोज नौडियाल


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