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शिक्षक पंकज की अनोखी कृति: माचिस की 20 हजार तिल्लियों से बनाया ‘श्री शिव राहु मंदिर’


एबीएन आवाज़ न्यूज़ 

पैठाणी (पौड़ी गढ़वाल)। कला और धैर्य का अद्भुत संगम पेश करते हुए शिक्षक पंकज सुन्दरियाल ने माचिस की लगभग 20,000 तिल्लियों से ‘श्री शिव राहु मंदिर’ की अद्वितीय प्रतिकृति तैयार की है। यह मंदिर पौड़ी जिले के पैठाणी गांव में काली नयार और पश्चिमी नयार नदियों के संगम पर स्थित है और कत्यूरी शैली में बना प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। हाल ही में इस मंदिर ने उस समय सुर्खियां बटोरीं जब जिले के पूर्व और वर्तमान जिलाधिकारी ने इसका दौरा किया।

एक संयोग ने उनके जीवन की दिशा बदल दी..

पंकज सुन्दरियाल की इस कलात्मक यात्रा की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी। उन्होंने बताया कि उस समय वे बेरोजगारी से जूझ रहे थे और मानसिक रूप से काफी निराश थे। लेकिन एक संयोग ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। एक दिन टेबल पर फेवीकोल की बूंद माचिस की डिब्बी पर गिरी और यहीं से उनके हस्तशिल्प के सफर की शुरुआत हुई। अगले ही दिन वे लक्ष्मीनारायण मंदिर में दर्शन कर माचिस की डिब्बियाँ और फेवीकोल खरीद लाए और पहली रचना की आधारशिला रख दी।


गोलाकार गुम्बद और वृत्ताकार ऊपरी भाग को बनाना विशेष रूप से था चुनौतीपूर्ण..

तब से अब तक पंकज ने कई मशहूर संरचनाओं की कलात्मक प्रतिकृतियां तैयार की हैं, जिनमें ताजमहल, नार्वे का बोरगंड चर्च, चाइना का कार्नर टावर, श्रीराम मंदिर अयोध्या और श्री महासू देवता मंदिर शामिल हैं। 13 वर्षों के लंबे सफर के बाद, विभागीय स्थानांतरण के उपरांत उनके मन में पुनः ‘श्री राहु मंदिर पैठाणी’ की प्रतिकृति बनाने की प्रेरणा जगी। आठ महीनों की मेहनत के बाद उन्होंने इस कठिन संरचना को माचिस की तिल्लियों से साकार किया, जिसमें गोलाकार गुम्बद और वृत्ताकार ऊपरी भाग को बनाना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था।

वर्तमान में श्री बद्रीनाथ मंदिर की कलात्मक प्रतिकृति पर कर रहे कार्य...

पंकज श्री बद्रीनाथ मंदिर की कलात्मक प्रतिकृति पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि “आज की एआई की दुनिया में हस्तशिल्प की मांग और महत्ता लगातार बढ़ रही है। यह क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम बन सकता है, बशर्ते वे मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास को अपना मूलमंत्र बनाएं।”

Vedio:


शिक्षक पंकज का जीवन है स्वयं में प्रेरणा...

शिक्षक पंकज का जीवन स्वयं में प्रेरणा है। गणित में निष्णात, बीएड और पर्यटन व योग में पीजी डिप्लोमा करने के बावजूद जब उन्हें नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने पौड़ी बस अड्डे में दुकान खोली और फोटोग्राफी, ट्रांसपोर्ट और फूलों का काम शुरू किया। यह व्यापार सफल रहा लेकिन पारिवारिक असहमति और सामाजिक दबाव के चलते उन्होंने यह भी छोड़ दिया। स्कूलों से नौकरी न मिलने पर उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया, और जब दिन के समय हाथ खाली रहे तो कला ने उन्हें एक नई पहचान दी।

अब पंकज की है ये एक नई योजना...

अब पंकज एक नई योजना पर भी कार्य कर रहे हैं, जिसमें वे कंकड़ और पत्थरों से एक रचना तैयार कर युवाओं को प्रेरणा देने की योजना बना रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि युवा हस्तशिल्प जैसे सृजनात्मक क्षेत्रों की ओर आकर्षित हों और आत्मनिर्भर बनें।

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