मनोज नौडियाल
देहरादून। देहरादून में भागवत कथा शुभारंभ के पावन अवसर पर कथा से पूर्व विशाल शोभा यात्रा निकाली गयी। जिसमें पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ 101 महिलाओं द्वारा पीले वस्त्रों से सुसज्जित कलश यात्रा डिफ्फेन्स कॉलोनी के मुख्य मार्गो से होती हुई सी सेक्टर 2 डिफेन्स कालोनी तक पहुंची। जहां पर वेद मंत्रोच्चरण से भगवान शंकर का अभिषेक के साथ व्यास का पूजन व भागवत का पूजन किया गया।
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बता दें की कथा के प्रथम दिवस प्रवचन करते हुए देवभूमि उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध कथा मर्मज्ञ ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने कहा कि पुराणों का दृष्टिकोण काल्पनिक नही यथार्थ सत्य है, कर्म उस व्यवस्था की उत्तमता का नाम है जो श्रद्धा की नींव पर खड़ी है। हमारी प्रगति हमारी प्राचीन संस्कृति है यह संस्कृति श्रद्धा के जिन आधारो पर खड़ी है उसका ज्ञान भागवत की कथा से प्राप्त हुआ मनुष्य की प्रगति का आधार कर्म है। प्राचीन काल मे वेद व्यास ने आधात्मिक दृश्टिकोण रखकर पुराणों की रचना की है, सृष्ठि सत्य है परंतु उससे बड़ा सत्य परमात्मा है जिसके कारण असत्य जगत भी सत्य दिखता है उस परमात्मा रूपी सत्य को जानकर मनुष्य अस्थाई आनंद व अमृत की कर सकता है,
पुराणों का वह दृष्टिकोण यथार्थ सत्य है और वह दृष्टि कोण दिया है जिसके चलते भौतिकवाद एवम आधात्मिक दोनों विचारको को मस्तिक झुकाना पड़ता है। द्वारिका के अवशेषो का मिलना भी इस संस्कृति की सत्यता है धर्म व आस्थावान बनना व दुसरो की भी बनाना मानव का परम धर्म है मनुष्य देह प्राप्त करके ही हम किसी का सम्मान कर सकते है, इसका अध्यन मानव को अपने व लोक कलयथार्थ करना चाहिए। इस अवसर पर श्रीमती प्रसन्ना देवी लखेड़ा, अतुल, राहुल, मनोज, श्रीमती गंगोत्री देवी, श्रीमती विलोचना देवी, श्रीमती हेमलता, विनोद, हरिप्रसाद, दीपा माता, विना तनेजा, अमिता शर्मा, अश्विन मुंडेपी, अनिता कोठारी, आसुतोष काला प्रधान आदि मौजूद रहे।
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