मनोज नौडियाल
देहरादून। साकेत कॉलोनी अजबपुर देहरादून में भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान कथा के चौथे दिन ज्योतिष व्यास आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने कथा में बताया की धर्म दो प्रकार के होते हैं, पर और अपर धर्म! भगवान में होना पर धर्म सजा फल परमात्मा प्राप्ति है। दूसरा अपर धर्म वह ईष्वर की भक्ति को छोड़कर केवल वर्णाश्रम धर्म का पालन है उसका परिणाम स्वर्गादिक लोक प्राप्ति है। अपर धर्म अधिक वर्णाश्रम में परिवर्तन शील है किंतु पर धर्म सदा एकरस एवम स्वाभाविक है।
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प्रत्येक वर्ण को ईश्वर भक्ति का आदेश शास्त्रों द्वारा दिया गया, बस यही क्रम योग है उक्त उदगार साकेत कॉलोनी अजबपुर देहरादून में चल रही भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में व्यक्त करते हुए व्यास आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने कहा। उन्होंने बताया की अपर धर्म स्वरूप वर्णाश्रम धर्म के परधर्म स्वरूप ईश्वर भक्ति सयुक्त कर देने से परिणाम प्राप्त होता है, केवल आप या आगंतुक प्राकृत धर्म से ईश्वर प्रप्ति माया प्रविर्ती की समस्या हल नही हो सकती है। भगवान कहते है जो वैदिक वर्णाश्रम को नही मानता वह मेरा शत्रु है वह कैसे प्रिय हो सकता है किंतु जो इन धर्मो को तो त्याग मेरी भक्ति करता वह मुझे प्राप्त करता यह स्वाभविक प्रिय है, इसलिए कलयुग में भक्ति के द्वारा परमात्मा को मिला जा सकता है। इस अवसर पर श्रीमती नीलम नैथानी, चंद्र प्रकाश जोशी, श्रीमती कमल जोशी, डॉ मुकेश गुप्ता, श्रीमती ज्ञान माला नौटियाल, सुमित, अखिल गढवाल सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना, संघ के ललित पंत, बीना भट्ट, गजेन्द्र भूषण तिवारी उपस्थित रहे।
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