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कण्वाश्रम में योग प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, स्वामी विश्वपाल जयन्त बोले – योग मानसिक शांति और आत्मानुशासन का आधार

 

कण्वाश्रम में योग प्रतियोगिता का आयोजन, योगासन करते छात्र


कण्वाश्रम में योग प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, स्वामी विश्वपाल जयन्त बोले – योग मानसिक शांति और आत्मानुशासन का आधार

कण्वाश्रम (पौड़ी गढ़वाल)।
कण्वाश्रम स्थित वैदिक गुरुकुल महाविद्यालय में योग प्रतियोगिता का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। इस अवसर पर आश्रम के संस्थापक स्वामी विश्वपाल जयन्त ने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, आत्मानुशासन और संतुलित जीवन का आधार है

कार्यक्रम में वैदिक गुरुकुल कण्वाश्रम के वैदिक वटुओं के साथ-साथ सार्थक योगशाला, क्रेडिल पब्लिक स्कूल तथा गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर (हरिद्वार) के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न योगासनों का सुंदर एवं अनुशासित प्रदर्शन किया। योग प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर के प्रतिभागियों की सहभागिता ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। बच्चों और बालिकाओं के उत्कृष्ट योग प्रदर्शन को देखकर दर्शक अत्यंत प्रभावित और उत्साहित दिखाई दिए।

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🔹 दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

योग प्रतियोगिता का शुभारंभ स्वामी विश्वपाल जयन्त, गुरुकुल के प्रधानाचार्य मनमोहन नौटियाल, योग महाविद्यालय के प्राचार्य संजय रावत, डॉ. राजवीर, डॉ. रमाकांत कुकरेती, हेमन्त तिवारी, स्वामी विरक्त देव, पूजा अग्रवाल, डॉ. मेजर वीरपाल विद्यालंकार, जयवीर रावत, सचिन रावत, रविन्द्र रावत, सार्थक योगशाला के संरक्षक राकेश कण्डवाल, संस्कृत भारती के नगर अध्यक्ष डॉ. रमाकांत कुकरेती एवं विभाग सह-संयोजक कुलदीप मैन्दोला सहित गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।

कार्यक्रम के आरंभ में वैदिक वटुओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं मंत्रोच्चारण किया गया। इसके पश्चात सार्थक कण्डवाल द्वारा संगीतमय योग तथा सौम्या संस्कृति द्वारा योगमय प्रारंभिक प्रस्तुति दी गई।


🔹 निर्णायक मंडली की महत्वपूर्ण भूमिका

योग प्रतियोगिता में निर्णायक मंडली के रूप में प्रशिक्षिका संतोषी रावत, सोनम रावत, शुभम रावत, कविता कण्डवाल तथा प्राचार्य संजय रावत ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

🔹 योग के महत्व पर वक्ताओं ने रखे विचार

इस अवसर पर वक्ताओं ने योग के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नियमित योग अभ्यास से जीवन स्वस्थ, संयमित और संतुलित बनता है।
डॉ. मेजर वीरपाल विद्यालंकार ने विद्यार्थियों को “ऑपरेशन सिंदूर” के उदाहरण के माध्यम से योग से मिलने वाले अनुशासन, साहस एवं राष्ट्रसेवा की भावना को आत्मसात करने का संदेश दिया।
डॉ. रमाकांत कुकरेती ने कहा कि योग जीवन को दृढ़ बनाता है, कठिन परिस्थितियों में धैर्य प्रदान करता है और स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है।
कार्यक्रम में हेमन्त तिवारी, स्वामी विरक्त देव, पूजा अग्रवाल, जयवीर रावत, सचिन रावत एवं रविन्द्र रावत ने भी अपने विचार व्यक्त किए।


🔹 संचालन एवं विशेष प्रस्तुति

योग प्रतियोगिता का संचालन कुलदीप मैन्दोला द्वारा किया गया, जबकि मंचीय कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. राजवीर ने किया। योग के त्रिविध संयोजन का प्रभावशाली प्रदर्शन राकेश कण्डवाल द्वारा किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहना के साथ सराहा।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।



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