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श्रीमद्भागवत भागवत कथा! विषयों की निवर्ती में परम् सुख है: आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं. देखें


मनोज नौडियाल

देहरादून..... भोग प्रधान होने पर परमात्मा से मनुष्यों की दूरी होती है। जिसने सत्य को नही पहचाना जीवन मे वह भारी सुंदर मनमोहक वस्तुओं का परित्याग नही कर सकता जीवन को सफल बनाने वाला मनुष्य परम् लक्ष्य को प्राप्त करता है। जीवन की उदंडता व्यक्ति को स्व व स्वजनों से दूरी करवाती है। 

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यह बात आज चुखुवाला इन्दिरा कलोनी देहरादून में रतूड़ी लोगो के द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत भागवत कथा में व्यक्त करते हुए ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने व्यक्त करते हुए कहा जीवन मे मनुष्य आसक्ति रहित कर्म में वर्ताव करता है स्वभाव सुविचार की सुगंध जब आ जाये जीवात्मा परमात्मा का खिंचाव होता है। सुधार मनुष्य में जब होता है तो वैश्वानर नाम की अग्नि तथा अंतर बाह्य की प्रविर्ती मिट जाती जाती आसक्ति रहित व्यक्ति में शून्य की तरह व्यक्ति का स्वभाव होता है जैसे शून्य के साथ 1 जोड़ने पर संख्या बढ़ जाती है। ऐसे ही मनुष्य का व्यवहार भी प्रेम युक्त होता है समस्त प्राणियों के अंतःकरण की अशुद्धि ही स्व का अनहित होना आवश्यक होता है। 


अनहित उपदेशक गुरु मन ही है धुंधकारी रूपी आत्मा सब्द स्पर्श रूप रस गंध वेश्याओं की आसक्ति चोरी बुरे कर्म के लिए अनहित उपदेशक ये पांचों वेश्याएँ गुरु है काम क्रोध आदि सप्त ग्रंथि में जीव फंसता है। पुनः ज्ञान प्रकाश से जीव मुक्त हो सकता है भागवत जी के मूल में भक्ति का मतलब परमात्मा से जुड़ाव और धुंधकारी का मतलब द्वेष पूर्ण गौ कर्ण जैसे सरल व्यक्ति से भव रोग से तारने वाली औषधि रूप श्रीमद्भागवत की कथा दोषों को मिटाने के बाद परम् लक्ष्य की प्राप्ति कराती है। आज प्रातः शोभा यात्रा अखिल गढ़वाल सभा से 108 महिलाओं के द्वारा पीत वस्त्रों में सिर पर कलश लिए हुए गोविद बोलो हरि गोपाल बोलो भजन गाते हुए कथा पंडाल में पहुंचीजहां पर पुराण पूजन व्यास पूजन ठाकुर जी के पूजन के साथ प्रथम दिवस की कथा प्रारम्भ हुई। 

आज विशेष रूप से श्रीकांत रतूड़ी, प्रवीण श्रीधर, दुर्गा प्रसाद बासुदेव, कृष्ण कुमार ममगाईं, सोहन बौड़ाई, कांता धौला खण्डी, आशा, मालती, ऋतु, पुष्पा, कौशल्या, मीना ममगाईं, आदर्श, अवंतिका आदि भक्त भारी संख्या में उपस्थित थे!!!

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