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श्रीमद्देवी भागवत कथा का हुआ समापन! दुसरे को आनंद देने से चेतना का विस्तार होता है: आचार्य शिव प्रसाद ममगांई. देखें


मनोज नौडियाल

देहरादून..... दुसरे को आनंद देनें से आत्मा का विकास होता है, वास्तव में दुसरे को आनंद देनें से आप बड़े हो जाते हो, वास्तव में दुसरे को आनंदित देखना भी आत्मा का फैलाव है। किसी के घर में परेशानी से आप दुखी तो हो पाते हैं लेकिन बगल में किसी नें महल भी खड़ा कर दिया तो तभी भी आप दुखी हो जाते हैं जबकि महल बननें पर सुखी होना चाहिए।

उक्त विचार नवविहार कालोनी चूक्खू वाला में श्रीमद्देवी भागवत कथा के समापन दिवस पर ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य शिवप्रसाद ममगांई नें व्यक्त करते हुए कहा किसी की सुख प्राप्ति पर सुखी होना एक आत्मिक फैलाव है। आनंद देनें से चेतना का विस्तार होता है और जब चेतना का विस्तार होता है तो परमात्मा से चेतना लेने का आयात बढ़ जाता है जितना आयात है आपके पास उतना ही परमात्मा की कृपा की वर्षा होती है।

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अब आगे......

आप पर ब्रह्म का आनन्द का विस्तार है उसके लिए सत्पात्र चाहिए मूर्ती हमारे भावों का स्थूलरूप है स्वामी राम कृष्ण परमहंस जी तो दुर्गा की मूर्ती को अपनी माँ का रूप मानते थे। "जाकी रही भावना जैसी प्रभू मूरत देखी नित तैसी, अतः भावो ही विध्यते देवा" के अनुसार भावना ही में देवता निवास करते हैं मूर्ती पूजा भी हमको एकाग्रता के सूत्र में बांधती है तथा सृजन पालन पोषण संहरण शक्ति उस आदि शक्ति महामाया में जिसके सहारे देवों नें अरूणा सुर जिसनें छ पग दो पग और हथियार से मृत्यु ना हो बर मांगा था ब्रह्मा जी से वहीं देवों की प्रार्थना पर छ पग वालें भौरों के रूप में अरूणासुर का बध किया। 


वह देवी भ्रामरी कहलायी वही शक्ती सावित्री के रूप में नारी शक्ति की महता बढ़ायी, जिसनें यमराज से अपनें पती सत्यवान के प्राण वापस लौटाये। सास ससुर की आंख राज्य प्राप्त का वर मांगा था यह भारतीय नारी की भक्ती और शक्ती का प्रमाण जिसके सामने यमराज झुक गये आदि प्रसंगों पर व्यास जी नें सूदूर क्षेत्रों से आये लोगों को भावविभोर कर दिया। 


वहीं तत्पश्चात आयोजकों के द्वारा विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। आज विशेष रूप से कमलानंद भट्ट, जानकी देवी भट्ट, कमला प्रसाद भट्ट, जानकी पंत, प्रेम दत्त चमोली, आचार्य हर्षमणी चमोली, आचार्य दामोदर सेमवाल, आचार्य संदीप भट्ट, आचार्य संदीप बहुगुणा, आचार्य मुरलीधर सेमवाल, आचार्य दिवाकर भट्ट, रेखा भट्ट, राजीवनारायन भट्ट, गीता भट्ट, संजय भट्ट, देव आनद चमोली, मित्रानंद भट्ट, सोनी देवी, विमला देवी, हर्षमनी चमोली, कृष्णा कोठीयाल, जगतम्बा चमोली, कमला प्रसाद भट्ट, अनिता साफल्य, अमित स्त्रोत्र, लक्ष्मी बहुगुणा, चंद्रबल्लभ बछेती, नंदा तिवारी, महावीर प्रसाद, रेखा उनियाल, जगदीश रानाकोटी, सुशीला पुंडीर, कमला चमोली, सुरेंद्र नौटियाल आदि भक्त गण उपस्थित थे !!!

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