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पौड़ी गढ़वाल में घेरबाड़ योजना से 339 हेक्टेयर फसल सुरक्षित, जंगली जानवरों से किसानों को बड़ी राहत

पौड़ी गढ़वाल में घेरबाड़ योजना से सुरक्षित खेत और फसल


  • 102 परियोजनाओं के तहत 339 लाख रुपये खर्च

  • 15 विकासखंडों में किसानों की खेती को मिला संरक्षण

  • उत्पादन बढ़ा, किसानों का आत्मविश्वास हुआ मजबूत


📍 पौड़ी गढ़वाल | 21 मार्च 2026

पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान से जूझ रहे किसानों के लिए कृषि विभाग की घेरबाड़ (फेंसिंग) योजना राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। जिला योजना के तहत जनपद पौड़ी गढ़वाल में बड़े स्तर पर किए गए घेरबाड़ कार्यों से अब किसानों की फसलें सुरक्षित हो रही हैं और खेती के प्रति उनका रुझान भी बढ़ा है।

वित्तीय वर्ष 2025–26 में कृषि विभाग द्वारा 102 परियोजनाओं के माध्यम से घेरबाड़ कार्य कराया गया। इन परियोजनाओं पर कुल 339 लाख रुपये की लागत स्वीकृत की गई, जिसके तहत 339 हेक्टेयर कृषि भूमि को जंगली जानवरों से सुरक्षित किया गया है।



🌿 15 विकासखंडों में हुआ कार्य

प्रभारी कृषि अधिकारी मनविंदर कौर के अनुसार, यह कार्य एकेश्वर, जयहरीखाल, पोखड़ा, थलीसैंण, खिर्सू, पाबौ, रिखणीखाल, नैनीडांडा, बीरोंखाल, पौड़ी, कोट, कल्जीखाल, दुगड्डा, द्वारीखाल और यमकेश्वर विकासखंडों में कराया गया।

अधिकांश परियोजनाओं में 3 से 6 लाख रुपये की लागत से मजबूत फेंसिंग की गई, जिससे जंगली सूअर, बंदर और अन्य वन्यजीवों से फसलों को होने वाले नुकसान में कमी आई है।


🌾 किसानों को मिली बड़ी राहत

पहले जहां किसानों को दिन-रात खेतों की निगरानी करनी पड़ती थी, वहीं अब घेरबाड़ से उन्हें काफी राहत मिली है।

बीरोंखाल विकासखंड के ग्राम नौगांव के किसानों—सुशीला देवी, बिक्रम सिंह, जयपाल सिंह और नरेंद्र सिंह—ने बताया कि 130 मीटर लंबी घेरबाड़ से करीब 80 खेतों की सुरक्षा हुई है और फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है।



🏛️ प्रशासन का बयान

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान को देखते हुए घेरबाड़ योजना को प्राथमिकता दी जा रही है। जहां-जहां यह कार्य पूरा हो चुका है, वहां किसानों की चिंता कम हुई है और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ खेती कर पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस योजना का विस्तार कर अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित किया जाएगा, ताकि खेती को सुरक्षित और लाभकारी बनाया जा सके।



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