
कोटद्वार के डॉ पीतांबर दत्त बड़थ्वाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण पलायन पर चर्चा
कोटद्वार में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार संपन्न, माइक्रो फाइनेंस से महिला सशक्तिकरण और पलायन रोकने पर हुआ मंथन
17 राज्यों के 205 प्रतिभागियों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र, विशेषज्ञों ने पहाड़ी अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर दिया जोर
कोटद्वार।
डॉ. पीतांबर दत्त बड़थ्वाल हिमालयन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोटद्वार में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार (14 मार्च 2026) को समापन हो गया। सेमिनार का विषय “Micro Finance for Women Empowerment and Reduction in Rural Out Migration: Micro Evidence from Uttarakhand State” रहा, जिसका आयोजन भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) और उत्तराखंड सरकार के सहयोग से किया गया।
सेमिनार में उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन की समस्या, महिला सशक्तिकरण और माइक्रो फाइनेंस की भूमिका पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया।
महिला सशक्तिकरण में माइक्रो फाइनेंस की अहम भूमिका
टेक्निकल सेशन में की-नोट स्पीकर के रूप में शहीद भगत सिंह कॉलेज से आए प्रोफेसर डी.डी. चतुर्वेदी ने माइक्रो फाइनेंस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने विकास के लिए किसी सहारे का इंतजार किए बिना स्वयं आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सूक्ष्म वित्त (Microfinance) महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक प्रभावी माध्यम है।
सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे
समापन सत्र में मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि सशक्त उत्तराखंड के निर्माण के लिए सरकारी योजनाओं की जानकारी गांवों और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने संस्कार, संस्कृति और इतिहास को समाज की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और परिवार मजबूत होगा तो समाज भी मजबूत बनेगा।
पहाड़ी क्षेत्रों के विकास से रुकेगा पलायन
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डी.एस. नेगी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को समान अवसर और स्वतंत्रता देने के साथ-साथ समाज की सोच में बदलाव भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे। इसके लिए लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देना जरूरी है।
17 राज्यों के प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
सेमिनार की समन्वयक प्रो. प्रीति रानी ने दो दिवसीय सेमिनार की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस आयोजन में देश के 17 राज्यों से 205 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
आयोजन सचिव डॉ. अंशिका बंसल ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उत्तराखंड में पलायन की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति के सदस्य और वाणिज्य विभाग के प्राध्यापक डॉ. संतोष कुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि मंच संचालन डॉ. रोशनी असवाल ने किया।
सेमिनार में प्रो. बसंतिका कश्यप, प्रो. आर.एस. चौहान, प्रो. आदेश कुमार, प्रो. राखी डिमरी, डॉ. प्रवीण जोशी, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. विनोद सिंह, डॉ. रिचा जैन, डॉ. प्रियंका अग्रवाल, डॉ. मीनाक्षी वर्मा और डॉ. चंद्रप्रभा भारती सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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