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कोटद्वार के हॉकी खिलाड़ी रईस का उत्तराखंड पुलिस में चयन, संघर्ष से सफलता की प्रेरक कहानी

कोटद्वार के रईस ने मेहनत और हॉकी प्रतिभा के दम पर उत्तराखंड पुलिस में बनाई जगह 🏑💪
दिहाड़ी मजदूर के बेटे की यह सफलता हर युवा के लिए प्रेरणा है।

दिहाड़ी मजदूर के बेटे ने रचा इतिहास, उत्तराखंड पुलिस में हुआ चयन — हॉकी प्रतिभा से बनाया करियर

रिपोर्ट: मनोज नौडियाल 

  • कोटद्वार के रईस ने संघर्ष के बीच हासिल की बड़ी सफलता

  • खेल प्रतिभा और मेहनत के दम पर मिला उत्तराखंड पुलिस में स्थान

  • अब भारतीय हॉकी टीम में जगह बनाना अगला लक्ष्य


कोटद्वार से सफलता की प्रेरणादायक कहानी

कोटद्वार। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद एक युवा ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता की नई कहानी लिख दी। दिहाड़ी मजदूर के बेटे रईस का चयन उत्तराखंड पुलिस में हुआ है, जिससे पूरे परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर है।


दिहाड़ी मजदूर का बेटा बना पुलिस जवान

कोटद्वार के ग्रास्टनगंज वार्ड नं. 1 निवासी मुस्ताक अहमद, जो रोज़ाना दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, उनके बेटे रईस ने यह उपलब्धि हासिल की है। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बावजूद रईस ने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी।



खेल प्रतिभा बनी सफलता की कुंजी

रईस एक प्रतिभाशाली हॉकी खिलाड़ी हैं और राज्य स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्होंने उत्तराखंड अंडर-19 हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया है। उनकी खेल प्रतिभा और अनुशासन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।


परिवार का मिला पूरा सहयोग

रईस तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके बड़े भाई भी राज्य स्तरीय हॉकी खिलाड़ी रह चुके हैं, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते अब जिम ट्रेनर के रूप में कार्य कर रहे हैं। वहीं छोटा भाई भी हॉकी में करियर बनाने के लिए प्रयासरत है।

रईस की माता गृहिणी हैं और परिवार का सहयोग करते हुए पशुपालन भी करती हैं। पूरे परिवार ने मिलकर कठिन परिस्थितियों में रईस को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।



दूसरे प्रयास में मिली सफलता

रईस ने अपने दूसरे प्रयास में उत्तराखंड पुलिस में चयन प्राप्त किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, भाइयों, शिक्षकों और कोच को दिया।


कोच ने बताया अनुशासित और मेहनती खिलाड़ी

मोटाढांग मिनी स्टेडियम के हॉकी प्रशिक्षक के अनुसार रईस एक बेहद मेहनती, अनुशासित और प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने छात्रवृत्ति के सहारे अपनी पढ़ाई और खेल दोनों को जारी रखा।


अब भारतीय हॉकी टीम में खेलने का सपना

रईस का अगला लक्ष्य भारतीय हॉकी टीम में जगह बनाना है। वे देश के लिए खेलकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन करना चाहते हैं।



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