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चार धाम यात्रा के लिए बनेगा चिकित्सकों का पृथक कैडर, 10 फरवरी तक डीपीसी के निर्देश | उत्तराखंड स्वास्थ्य समाचार

 

चार धाम यात्रा के दौरान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए चिकित्सकों का पृथक कैडर बनाने की घोषणा करते स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत


चार धाम यात्रा के लिए बनेगा चिकित्सकों का पृथक कैडर, 10 फरवरी तक डीपीसी कराने के निर्देश

बॉण्डधारी डॉक्टरों के पीजी कोर्स हेतु बनेगी अलग अध्ययन नीति: डॉ. धन सिंह रावत

देहरादून, 24 जनवरी 2026।
चार धाम यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों का पृथक कैडर गठित करेगी। इसका प्रस्ताव शीघ्र ही कैबिनेट में लाया जाएगा। यह जानकारी प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दी।

डॉ. रावत ने बताया कि चार धाम यात्रा के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अलग कैडर तैयार किया जाएगा, जिसमें आवश्यक विशेषज्ञ पद शामिल होंगे। इसके साथ ही राजकीय मेडिकल कॉलेजों से बॉण्डधारी एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए पीजी कोर्स की पृथक अध्ययन नीति भी बनाई जाएगी, ताकि उनकी अनुपस्थिति से राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

250 चिकित्सकों का बनेगा रिजर्व पूल

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पीजी कोर्स पर जाने वाले चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए 250 डॉक्टरों का एक रिजर्व पूल बनाए जाने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में लाया जाएगा। इसके अतिरिक्त लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट पदों के पुनर्गठन, प्रशासनिक कैडर, प्रिक्योरमेंट कॉर्पोरेशन गठन तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलग कैडर से जुड़े प्रस्तावों पर भी शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।

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10 फरवरी तक डीपीसी पूरी करने के निर्देश

बैठक में डॉ. रावत ने स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न श्रेणी के चिकित्साधिकारियों की डीपीसी 10 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र अधिकारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिल सके।

उप जिला चिकित्सालयों में नए पद सृजित होंगे

उन्होंने बताया कि प्रदेश के उच्चीकृत एवं नवसृजित उप जिला चिकित्सालयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नए पदों के सृजन का प्रस्ताव भी जल्द कैबिनेट में रखा जाएगा, जिससे आम जनता को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।


बायोमेट्रिक उपस्थिति और सख्त कार्रवाई

बैठक में सभी चिकित्सा इकाइयों व मेडिकल कॉलेजों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने, गैरहाजिर चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई, साफ-सफाई व्यवस्था मजबूत करने और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार देने के निर्देश दिए गए। साथ ही आयुष्मान योजना के तहत लंबित बिलों के भुगतान और गोल्डन कार्ड धारकों की समस्याओं के शीघ्र समाधान पर भी जोर दिया गया।

बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में सचिव स्वास्थ्य सचिन कुर्वे, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अजय कुमार आर्य, निदेशक एनएचएम डॉ. रश्मि पंत, प्राचार्य हरिद्वार मेडिकल कॉलेज प्रो. सीएमएस रावत सहित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



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