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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यांचल का भव्य कवि सम्मेलन | Kotdwar News

 

कोटद्वार में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यांचल का भव्य कवि सम्मेलन


गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यांचल का भव्य कवि सम्मेलन, देशभक्ति कविताओं से गूंजा कोटद्वार

कोटद्वार। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यिक संस्था साहित्यांचल के तत्वावधान में एक भव्य एवं गरिमामय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसमें साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम में कोटद्वार नगर निगम के महापौर शैलेंद्र रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राज्य मंत्री समकक्ष ऋषि कडवाल विशिष्ट अतिथि रहे। इस अवसर पर साहित्यांचल के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र नैथानी एवं संस्था के संरक्षक एवं नवमनोनीत सदस्य  शिव प्रसाद कुकरेती की विशेष उपस्थिति रही।

कवि सम्मेलन का सशक्त एवं प्रभावशाली संचालन रिद्धि भट्ट ने किया। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण, सुमधुर एवं साहसी काव्य प्रस्तुति से श्रोताओं को अंत तक बाँधे रखा।

मुख्य अतिथि महापौर शैलेंद्र रावत ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्यिक सृजन, विशेषकर कविता, समाज को दिशा देने का कार्य करती है। कवि अपनी लेखनी से सामाजिक चेतना को जागृत कर नई पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे मोबाइल संस्कृति से दूरी बनाकर पुस्तकों और गुरुजनों के सान्निध्य में साहित्य से जुड़ें।


विशिष्ट अतिथि राज्य मंत्री समकक्ष ऋषि कडवाल ने कहा कि साहित्यांचल संस्था ने उन्हें एक लेखक के रूप में पहचान दिलाई। उन्होंने बताया कि साहित्य के माध्यम से समाज के समक्ष अपनी बात रखने की प्रेरणा उन्हें इसी मंच से मिली। साहित्यांचल ने अनेक नवोदित कवियों को मंच देकर आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य किया है।

कवि सम्मेलन में बसंत ऋतु, देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत शृंगारिक एवं ओजस्वी कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस सहित देश के महान बलिदानी नेताओं को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।

कार्यक्रम में नागार्जुन, रामधारी सिंह दिनकर, सुमित्रानंदन पंत, मैथिलीशरण गुप्त एवं सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जैसे महान कवियों की काव्य-शैली और विचारधाराओं की स्पष्ट झलक देखने को मिली।

कवि सम्मेलन का समापन राष्ट्रभक्ति के भावों और तालियों की गूंज के साथ हुआ।



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