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पौड़ी गढ़वाल में वनाग्नि रोकथाम को लेकर प्रशासन अलर्ट, डीएम ने ली समीक्षा बैठक

 

District Magistrate Swati S. Bhadoria reviewing forest fire prevention meeting in Pauri Garhwal


पौड़ी गढ़वाल में वनाग्नि रोकथाम को लेकर प्रशासन अलर्ट

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने ली समीक्षा बैठक, समय से तैयारी और जनसहभागिता पर दिया जोर

पौड़ी गढ़वाल, 05 फरवरी 2026।
जनपद में वनाग्नि की बढ़ती आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में वनाग्नि रोकथाम को लेकर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय, सतर्कता और ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि समय से की गई तैयारी ही वनाग्नि से होने वाले नुकसान को कम कर सकती है, वहीं इसमें जनसहभागिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने वन विभाग को निर्देशित किया कि जनपद से लेकर ग्राम स्तर तक गठित सभी समितियों को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए।

फायर वाचर तैनाती, उपकरणों की जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश

जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम के लिए उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों और मानव संसाधन की समुचित जांच की जाए तथा फायर वाचरों की तैनाती समय पर सुनिश्चित की जाए। साथ ही आग लगाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने सभी वन प्रभागों में कंट्रोल रूम स्थापित कर उनकी जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा आपात स्थिति में त्वरित सूचना तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

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संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान

जिलाधिकारी ने जिला मुख्यालय एवं सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिए कि कार्यालयों के आसपास घास-फूस, झाड़ियां एवं कूड़ा-करकट की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों, गांवों और कस्बों की प्राथमिकता के आधार पर मैपिंग कराने के निर्देश भी दिए गए।

इसके साथ ही युवा कल्याण अधिकारी को ग्राम स्तर पर गठित युवा मंगल दल, महिला मंगल दल एवं ग्राम प्रहरियों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए।

61.38 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित, 260 क्रू स्टेशन स्थापित

बैठक में जानकारी दी गई कि पौड़ी गढ़वाल जनपद का 61.38 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। वनाग्नि का सर्वाधिक खतरा 15 फरवरी से 15 जून के मध्य रहता है।
जनपद में 5795.50 हेक्टेयर क्षेत्र अति संवेदनशील तथा 70717 हेक्टेयर क्षेत्र संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित है। वर्तमान में 260 क्रू स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं।

9 कंट्रोल रूम, मॉक ड्रिल और जनजागरूकता अभियान

प्रभागीय वनाधिकारी पौड़ी वन प्रभाग महातिम यादव ने बताया कि वनाग्नि रोकथाम के लिए जनपद में कुल 09 कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। फायर वाचरों की तैनाती की प्रक्रिया प्रगति पर है।
ग्राउंड लेवल पर मॉक ड्रिल, शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही वनाग्नि रोकथाम के तहत लीसा विदोहन की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा रही है।

बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शिवमोहन शुक्ला, अधीक्षण अभियंता जल संस्थान प्रवीण सैनी, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी रविन्द्र फोनिया सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।



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