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उत्तराखण्ड में प्रथम समान नागरिक संहिता दिवस, सीएम धामी का बड़ा बयान

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समान नागरिक संहिता दिवस कार्यक्रम में संबोधित करते हुए


उत्तराखण्ड में मनाया गया प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस”, मुख्यमंत्री धामी ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

📍 देहरादून | 27 जनवरी 2026

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर, गढ़ी कैंट में आयोजित प्रथम “समान नागरिक संहिता (UCC) दिवस” समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने यूसीसी के निर्माण से जुड़े समिति सदस्यों, इसके सफल क्रियान्वयन में भूमिका निभाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों तथा पंजीकरण कार्य में सहयोग देने वाले वीएलसी (VLC) को सम्मानित किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यूसीसी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।



🟢 “उत्तराखण्ड के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है यूसीसी दिवस” – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 27 जनवरी का दिन उत्तराखण्ड के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, क्योंकि इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हुई।
उन्होंने कहा कि यूसीसी के माध्यम से सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना हुई है। सनातन संस्कृति सदैव समरसता और समानता की पक्षधर रही है और यूसीसी उसी भावना को आगे बढ़ाता है।


📜 अनुच्छेद 44 और डॉ. आंबेडकर के विचारों को मिला मूर्त रूप

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 44 के अंतर्गत समान नागरिक संहिता को राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में शामिल किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव से पूर्व यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया गया, जिसे देवभूमि की जनता ने भरपूर समर्थन दिया।



🏛️ 7 फरवरी 2024 से 27 जनवरी 2025 तक का ऐतिहासिक सफर

मुख्यमंत्री ने बताया कि सत्ता संभालते ही यूसीसी को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

  • 7 फरवरी 2024: यूसीसी विधेयक विधानसभा से पारित

  • 11 मार्च 2024: राष्ट्रपति की स्वीकृति

  • 27 जनवरी 2025: उत्तराखण्ड में यूसीसी विधिवत लागू


👩‍⚖️ महिला सशक्तिकरण की नई शुरुआत

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने से महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है।
उत्तराखण्ड की मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है।
यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है।


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⚖️ सभी धर्मों के लिए समान कानून, कुप्रथाओं पर प्रहार

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक कुप्रथाओं को समाप्त करने का कानूनी प्रयास है।
यूसीसी में सभी धर्मों के लिए:

  • विवाह

  • विवाह-विच्छेद

  • उत्तराधिकार

  • संपत्ति का बंटवारा

  • बाल अधिकार

से जुड़े नियम समान किए गए हैं।
संपत्ति के अधिकार में पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं।


💑 लिव-इन रिलेशनशिप पर स्पष्ट कानून

युवक-युवतियों की सुरक्षा के उद्देश्य से लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

  • पंजीकरण की सूचना माता-पिता/अभिभावक को दी जाती है

  • जानकारी पूर्णतः गोपनीय रहती है

  • लिव-इन से जन्मे बच्चों को जैविक संतान के समान अधिकार



📊 एक वर्ष में रिकॉर्ड पंजीकरण और डिजिटल सफलता

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी के माध्यम से सरकारी सेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी और सुलभ हुई हैं।

  • पहले औसतन 67 विवाह पंजीकरण प्रतिदिन

  • अब 1400+ प्रतिदिन

  • 30% से अधिक ग्राम पंचायतों में 100% पंजीकरण

  • एक वर्ष में 5 लाख से अधिक आवेदन, 95% से अधिक निस्तारित

  • 7,500+ कॉमन सर्विस सेंटर सक्रिय


🛡️ नए संशोधन, सख्त प्रावधान

मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में यूसीसी में संशोधन विधेयक को राज्यपाल की स्वीकृति मिली है।
इसके तहत:

  • पहचान छिपाकर या गलत जानकारी देकर विवाह करने पर विवाह निरस्त

  • विवाह और लिव-इन में बल, धोखाधड़ी, दबाव पर कड़ी सजा

  • बहुविवाह और विवाह विच्छेद मामलों में सख्त कार्रवाई



👥 समारोह में ये गणमान्य रहे उपस्थित

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, श्रीमती सविता कपूर, सुरेश गड़िया, बृज भूषण गैरोला,
सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ,
यूसीसी समिति सदस्य पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह,
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, श्री मनु गौड़, अजय मिश्रा,
विशेष सचिव गृह निवेदिता कुकरेती सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।


🔷 FAQ – समान नागरिक संहिता दिवस (UCC Uttarakhand)

❓ प्रश्न 1: समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है?

उत्तर:
समान नागरिक संहिता (UCC) एक ऐसा कानून है जिसके अंतर्गत सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े नियम समान होते हैं, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो।


❓ प्रश्न 2: उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता कब लागू हुई?

उत्तर:
उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता को 27 जनवरी 2025 को विधिवत रूप से लागू किया गया।


❓ प्रश्न 3: उत्तराखण्ड में प्रथम समान नागरिक संहिता दिवस कब मनाया गया?

उत्तर:
उत्तराखण्ड में प्रथम समान नागरिक संहिता दिवस 27 जनवरी 2026 को मनाया गया।


❓ प्रश्न 4: समान नागरिक संहिता दिवस का आयोजन कहाँ हुआ?

उत्तर:
समान नागरिक संहिता दिवस का आयोजन हिमालयन कल्चरल सेंटर, गढ़ी कैंट, देहरादून में किया गया।


❓ प्रश्न 5: यूसीसी लागू करने का उद्देश्य क्या है?

उत्तर:
यूसीसी का मुख्य उद्देश्य समाज में समानता, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना है।


❓ प्रश्न 6: समान नागरिक संहिता से महिलाओं को क्या लाभ मिला है?

उत्तर:
यूसीसी से महिलाओं को हलाला, तीन तलाक, बहुविवाह और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है और संपत्ति में समान अधिकार सुनिश्चित हुए हैं।


❓ प्रश्न 7: क्या यूसीसी किसी धर्म के खिलाफ है?

उत्तर:
नहीं, समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है। यह केवल सामाजिक कुप्रथाओं को समाप्त करने और समान कानून लागू करने का प्रयास है।


❓ प्रश्न 8: क्या लिव-इन रिलेशनशिप पर भी यूसीसी लागू होती है?

उत्तर:
हाँ, यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और इससे जन्मे बच्चों को पूर्ण कानूनी अधिकार दिए गए हैं।


❓ प्रश्न 9: यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में क्या बदलाव आया?

उत्तर:
यूसीसी लागू होने से पहले औसतन 67 विवाह पंजीकरण प्रतिदिन होते थे, जो अब बढ़कर 1400 से अधिक प्रतिदिन हो गए हैं।


❓ प्रश्न 10: समान नागरिक संहिता को किसके मार्गदर्शन में लागू किया गया?

उत्तर:
समान नागरिक संहिता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू किया गया।



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